भारत (सिंध) पर अरबों का आक्रमण - कारण और प्रभाव या परिणाम | Conquest of Sindh by Arabs

अरबों द्वारा सिंध पर विजय

अरबों द्वारा सिंध पर विजय; सिंध पर मोहम्मद बिन कासिम का आक्रमण इतिहास की रोमांचकारी घटना है। मोहम्मद साहब की मृत्यु के पश्चात 100 वर्ष के अंदर ही खलीफा ने तलवार के बल पर इस्लाम धर्म का प्रचार सीरिया, मेसोपोटामिया,  ईरान, अफगानिस्तान,  बलूचिस्तान, ट्रांस ऑक्सीआना, दक्षिणी फ्रांस, पुर्तगाल, मिस्र और अफ्रीका के संपूर्ण उत्तरी तट पर कर दिया। अरबों के आक्रमण के समय भारत की पश्चिमोत्तर सीमा पर तीन हिंदू राज्य थे — उत्तर में कपिशा (काबुल), दक्षिण में सिंधु और इन दोनों के बीच में शाओकूट अथवा साओली। अरबों का भारत पर सबसे पहला आक्रमण 636- 637 ई० में खलीफा उमर के शासनकाल में ‘उमन’ नामक स्थान पर हुआ। 643 ई० - 644 ई० के बीच उम्मैद खलीफाओं ने भारत पर आक्रमण किया, परंतु इन आक्रमणों के द्वारा भारत में अरब वासी अपना राज्य स्थापित करने में विफल रहे। 711 ई० मैं अरबों ने मोहम्मद बिन कासिम के नेतृत्व में सिंध पर आक्रमण किया। यह आक्रमण  भारत के मुस्लिम इतिहास में विशेष महत्व रखता है। 

भारत (सिंध) पर अरबों का आक्रमण - कारण और प्रभाव या परिणाम | Conquest of Sindh by Arabs

मोहम्मद बिन कासिम के आक्रमण के कारण 

विभिन्न विद्वानों ने वर्गों के सिंध पर आक्रमण के अनेक कारण बताए हैं जिनमें प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं— 

(1) मोहम्मद बिन कासिम एक वीर योद्धा था और उसका उद्देश्य भारत को जीतकर अरब साम्राज्य का विस्तार करना था।

(2) भारत की अतुल धन-संपत्ति ने भी मोहम्मद बिन कासिम को भारत पर आक्रमण करने के लिए प्रोत्साहित किया।

(3) धार्मिक उत्साह भी अरबों के आक्रमण का एक प्रमुख कारण रहा‌ था।

(4) तात्कालिक कारण

अरब आक्रमण का तात्कालिक कारण यह था कि आठवीं शताब्दी के प्रारंभ में श्री लंका के राजा ने उपहार से भरे हुए कुछ जहाज इराक के गवर्नर इज्जाज के लिए भेजें, परंतु इन जहाजों को सिंध के बंदरगाह देवल के निकट कुछ समुद्री डाकुओं ने लूट लिया। उस समय सिंध और मुल्तान का शासक ब्राह्मण राजा दाहिर था। इज्जाज ने जब राजा दाहिर क्षतिपूर्ति देने के लिए कहा तो दाहिर ने उत्तर दिया कि यह डाकू मेरे अधीन नहीं है। इस पर इज्जाज ने 711 ई० में उबेदुल्लाह के नेतृत्व में सिंध पर आक्रमण करने के लिए एक सेना भेजी। जो परास्त (हार) हो गई। तब उसने अपने किशोर भतीजे और दामाद मोहम्मद बिन कासिम को जिसकी आयु समय केवल 17 वर्ष थी, एक सेना के साथ सिंध पर आक्रमण करने के लिए भेजा। 

 #  मोहम्मद बिन कासिम एक कुशल सेनापति था। वह 1712 भी में मकरान (बलूचिस्तान) के मार्ग से भारत में प्रवेश हुआ। उसने भारत में प्रवेश करते ही देवल नगर को जीत लिया। फिर वह हिंदू को पार करके आगे बढ़ा। इसी समय सिंध के कुछ देश विद्रोही और राजा दाहिर की एक रानी उससे मिल गए, जिससे उसका कार्य काफी सरल हो गया। उसने नीरून, सेहवाग, सीसम और रावर को जीतकर ब्राह्मणवाद का घेरा डाल दिया। 20 जून, 712 ई० को ब्राह्मणवाद में दोनों सेनाओं के मध्य भीषण युद्ध हुआ, दही पराजित हुआ और युद्ध में ही मारा गया। 

अरबों की सफलता के कारण 

सिंध पर अरबों की विजय यात्रा उनकी सफलता के अनेक कारण बताए जाते हैं। 

(1) सिंधु वासियों का सामाजिक भेदभाव

(2) राजा दाहिर की लोकप्रियता

(3) जिंदगी उत्तरी भारत से पृथकता 

(4) सिंध लोगों का अंधविश्वास

(5) अरबों का धार्मिक उत्साह

(6) अरब सैनिकों की अधिक संख्या

(7) अरबों की रणकुशलता

(8) मकरान से सहायता

(9) दाहिर की सेना का विश्वासघात

(10) दाहिर की भूले

(11) मोहम्मद बिन कासिम का आकर्षक व्यक्तित्व 

इन सभी कारणों से अरबों ने सिंध पर सफलतापूर्वक विजय प्राप्त कर ली थी। 

अरबों की सिंध विजय के परिणाम या प्रभाव 
अरब आक्रमण के प्रभाव या परिणाम 

भारत और इस्लाम के इतिहास में और वह द्वारा शिंदे विजय किया जाना एक घटना मात्र थी। सिंध पर अरबों की विजय के निम्नलिखित प्रभाव या परिणाम पड़े — 

(1) अनेक हिंदू जजिया कर से बचने के लिए मुसलमान बन गए जिससे सिंध सदैव के लिए एक मुस्लिम बहुसंख्यक प्रांत बन गया।

(2) बगदाद के खलीफा ने अनेक भारतीय विद्वानों को अपने यहां बुलाया जिन्होंने भारतीय दर्शन, ज्योति शादी की संस्कृत ग्रंथों का अरबी भाषा में अनुवाद किया।

(3) अनेक भारतीय वैद्य बगदाद की अस्पतालों में नियुक्त किए गए।

(4) अरबों ने हिंदुओं से राज्य प्रबंध से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त की।

(5) इसी प्रकार, इसी प्रकार अरबों ने भारतीय दर्शन, ज्योतिष वैद्यक, गणित आदि का अध्ययन किया और उन्होंने यूरोप पहुंचकर इस ज्ञान का प्रसार किया।

(6) अरबों की विजय ने ही भारत में इस्लाम के प्रसार का सूत्रपात किया। अपने आक्रमण के उपरांत मोहम्मद बिन कासिम ने ही सर्वप्रथम हिंदुओं को बलपूर्वक मुसलमान बनाया था।

समीक्षा — इस्लाम के प्रारंभिक प्रभाव ग्रहण करने योग्य वर्षों में यूनान की अपेक्षा भारत ने ही अरबों को शिक्षित किया, उनकी दार्शनिक भावनाओं एवं धार्मिक आदर्शों का निर्माण किया और साथ ही साहित्य कला और स्थापत्य के क्षेत्र में उनकी अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित किया। 

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